विवाह व्यक्तिगत, विचारधारा सार्वजनिक ... निधि-उमर की शादी, पहले पायल को अब्दुल्ला बनाया अब निधि को, नीलेश-महेश भट्ट का पुराना रिश्ता-- "जवानी में चर्चा बुढ़ापे में क़यामत" -------------------------------------------------------- 30 अक्टूबर को निधि राजदान और उमर अब्दुल्ला ने पुनर्विवाह किया । इनकी शादी सिर्फ निजी खबर नहीं। यह उस घेरे की याद दिलाती है, जहां नाम बार-बार एक-दूसरे से जुड़ते दिखते हैं। निधि पहले नीलेश मिश्रा की पत्नी थीं। नीलेश को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका महेश भट्ट ने दिया था—‘जिस्म’ के गाने से। महेश भट्ट उनके मेंटर रहे। ये वही महेश भट्ट है जो मुंबई आतंकी हमले को हिंदू टेररिज्म सिद्ध कर रहा था।उमर अब्दुल्ला का राजनीतिक रिकॉर्ड भी जाना-पहचाना है—अनुच्छेद 370 का विरोध, कश्मीर की स्वायत्तता का पक्ष और पाकिस्तान से संवाद की वकालत। कश्मीरी पंडितों के पलायन और हत्याओं पर स्वतंत्र जांच की मांग आज भी अधूरी है। पहले के एनडीटीवी की निधि राजदान आतंकियों की पैरोकारी किया करती थी मतलब एक ही थाली के लाल चट्टे बट्टे हैं। सवाल निजी रिश्तों का नहीं। सवाल यह है कि क्या भारत में एक ऐ...
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निधि-उमर की शादी, पहले पायल को अब्दुल्ला बनाया अब निधि को, नीलेश-महेश भट्ट का पुराना रिश्ता-- "जवानी में चर्चा बुढ़ापे में क़यामत" -------------------------------------------------------- निधि राजदान और उमर अब्दुल्ला की शादी सिर्फ निजी खबर नहीं। यह उस घेरे की याद दिलाती है, जहां नाम बार-बार एक-दूसरे से जुड़ते दिखते हैं। निधि पहले नीलेश मिश्रा की पत्नी थीं। नीलेश को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका महेश भट्ट ने दिया था—‘जिस्म’ के गाने से। महेश भट्ट उनके मेंटर रहे। ये वही महेश भट्ट है जो मुंबई आतंकी हमले को हिंदू टेररिज्म सिद्ध कर रहा था।उमर अब्दुल्ला का राजनीतिक रिकॉर्ड भी जाना-पहचाना है—अनुच्छेद 370 का विरोध, कश्मीर की स्वायत्तता का पक्ष और पाकिस्तान से संवाद की वकालत। कश्मीरी पंडितों के पलायन और हत्याओं पर स्वतंत्र जांच की मांग आज भी अधूरी है। पहले के एनडीटीवी की निधि राजदान आतंकियों की पैरोकारी किया करती थी मतलब एक ही थाली के लाल चट्टे बट्टे हैं। सवाल निजी रिश्तों का नहीं। सवाल यह है कि क्या भारत में एक ऐसा वैचारिक नेटवर्क बना है, जहां कुछ पत्रकार, लेखक, फिल्मकार और राजनीतिक आवाजें...
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राजनीति मे अंत मे जीत गणित की होती है, भारत की वृद्धि विकास दर 7.8% रही, ये अप्रैल से जून वाली तिमाही की है। सामान्य जनता पर असर अप्रत्यक्ष होता है मगर सरकार के स्तर पर ये बहुत बड़ी उपलब्धि है। होर्मूज अब भी बंद है, रूस यूक्रेन युद्ध मे है बावजूद उसके इतनी जीडीपी मजाक नहीं है, लेकिन ट्रम्प चाचा के अब उल्टे दिन चल रहे है और यही सबसे रोमांचक बात है। दरसल अमेरिका मे मध्यावधि चुनाव होने है और ये ट्रम्प की अग्निपरीक्षा है, यदि रिपब्लिकन पार्टी हार गयी तो ट्रम्प का सूर्य डूब गया समझो। जैसे भारत मे संसद है वैसे अमेरिका मे कांग्रेस है इसके भी दो सदन है सबसे बड़ी सीनेट दूसरा हॉउस। अभी ट्रम्प चाचा उड़ रहे थे क्योंकि इन दोनों सदनो मे उनके पास बहुमत था, लेकिन ट्रम्प की समस्या है उनकी अप्रूवल रेटिंग। आप सोचिये मोदीजी की नई रेटिंग 68% है जबकि ट्रम्प की 33%। आप सोचकर देखिये ट्रम्प पर कितना प्रेशर होगा, ईरान को लेकर भी यही समस्या है। दरसल अमेरिका का राष्ट्रपति सीधे युद्ध नहीं छेड़ सकता सिर्फ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रम्प भी वही कर रहे है इसलिए ईरान मे वैसे परिणाम नहीं आये जैसे इराक मे आये थे। इसके विप...
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--- अमेरिका -- भारत -- और -- तिलचट्टा ---- अमेरिका को अपना नुकसान बर्दाश्त नहीं है। अमेरिका को यह भी पसंद नहीं है कि उसकी दादागिरी में कोई दखल डाले ? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो - यह अमेरिका को पसंद नहीं है। सामरिक क्षेत्र में उसकी शाख को बट्टा लगे - यह भी उसे बर्दाश्त नहीं? इस व्यवहार में अमेरिका का पक्ष विपक्ष - सबों की राय एक है। दुनियां के देशों को औकात पर लाने के लिए अमेरिका समय-समय पर बेइज्जती भी करने से बाज नहीं आता? जरा ख्याल कीजिए? कैसे हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की पगड़ी और वस्त्र उतरवाकर एयरपोर्ट पर जांच किया गया था? यह जांच नहीं था भाई साहब ! यह भारत की प्रतिष्ठा का मान-मर्दन हुआ था? अमेरिका दूसरे देशों में किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए OPERATION 37 और Deep State का प्रयोग करता है। यह अमेरिका का एक गैर सरकारी संगठन है जिसका कमान अमेरिका के राष्ट्रपति के हाथ में होता है। इसका संचालन अमेरिका का खुफिया विभाग CIA, सेना के विशेषज्ञ, आला अधिकारी, घटनाओं को अंजाम देने वाले ट्रेंड लोग और दुनियां से नफरत करने वाले अमेरिकी पूंजीपति ...
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लोग कहते हैं कि आजकल की जेनरेशन बहुत बुद्धिमान है। पर मुझे लगता है कि इससे चूतिया जेनरेशन आज तक पैदा नहीं हुई। क्योंकि इनको मालूम ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और उसके परिणाम क्या होंगे। चार दिन से जंतर-मंतर के वीडियो देख रहा हूँ। सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं। ये वीडियो कहाँ से आईं? ये उसी भीड़ के एक हिस्से ने बनाई हैं, जो जंतर-मंतर पर मौजूद है। वहाँ से जो भी वीडियो आ रहा है, वह हमें बहुत कुछ दिखा रहा है। उस भीड़ में लड़के हैं, लड़कियाँ हैं, यंग जेनरेशन है। सब 20–22 साल के आसपास के। फैंसी टी-शर्ट, फैंसी कपड़े और फैंसी हेयरस्टाइल बनाकर इस तरह जंतर-मंतर पर घूम रहे हैं जैसे यह कोई आंदोलन नहीं, बल्कि फैशन शो या पिकनिक स्पॉट हो। यहाँ आकर यूट्यूबर्स और मीडिया कैमरों के सामने बाइट देना, गालियाँ देना और अजीब-अजीब स्लोगन लिखे हुए कट-आउट हाथ में लेकर घूमना, एक तरह का स्टेटस सिंबल बन गया है। लड़कियाँ ऐसे कट-आउट लेकर घूम रही हैं जिन पर इतने भद्दे, गंदे और अश्लील स्लोगन लिखे हैं कि मेरी जेनरेशन के लोगों को उन्हें पढ़ने में भी शर्म आती है। देश के प्रधानमंत्री के लिए, देश के लिए ज...
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वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे" पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है। अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं। इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीड...
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वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे" पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है। अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं। इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीड...
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स्तम्भ - १६/२०२५ *ऑपरेशन सिंदूर -* भारत में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला 26/11 था जब पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई की धरती पर मौत, दहशत का खूनी खेल खेला था। इस हमले सैकड़ों भारतीय और विदेशी नागरिक मारे गए थे, तब केंद्र और राज्य दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकार थी। पूरा देश और सेना आक्रोश में थी, सेना इस हमले का बदला लेना चाहती थी लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सेना को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया। वैसे भी मनमोहन सिंह एक कठपुतली प्रधानमंत्री थे जिन्हें अपनी मैडम से जो आदेश प्राप्त होता था वो केवल उतना ही करते थे क्योंकि वो देश के प्रधानमंत्री कम मैडम के सेवादार ज़्यादा थे। कांग्रेस बस कड़ी निंदा और डोज़ियर पे डोज़ियर भेजने का खेल खेलती रही लेकिन पाकिस्तान पर हमला तो दूर एक गोली तक नहीं चलाई उल्टे तब कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ मिलकर इस हमले को आरएसएस का षड्यंत्र बताने में देरी नहीं की। कांग्रेस ने सुशील शिंदे और पी चिदंबरम के माध्यम से देश की संसद से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की निंदा करने की बजाय इसे भगवा आतंकवाद का र...
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स्तम्भ - १६/२०२५ *ऑपरेशन सिंदूर -* भारत में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला 26/11 था जब पाकिस्तान से आए आतंकियों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई की धरती पर मौत, दहशत का खूनी खेल खेला था। इस हमले सैकड़ों भारतीय और विदेशी नागरिक मारे गए थे, तब केंद्र और राज्य दोनों ही जगह कांग्रेस की सरकार थी। पूरा देश और सेना आक्रोश में थी, सेना इस हमले का बदला लेना चाहती थी लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सेना को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया। वैसे भी मनमोहन सिंह एक कठपुतली प्रधानमंत्री थे जिन्हें अपनी मैडम से जो आदेश प्राप्त होता था वो केवल उतना ही करते थे क्योंकि वो देश के प्रधानमंत्री कम मैडम के सेवादार ज़्यादा थे। कांग्रेस बस कड़ी निंदा और डोज़ियर पे डोज़ियर भेजने का खेल खेलती रही लेकिन पाकिस्तान पर हमला तो दूर एक गोली तक नहीं चलाई उल्टे तब कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ मिलकर इस हमले को आरएसएस का षड्यंत्र बताने में देरी नहीं की। कांग्रेस ने सुशील शिंदे और पी चिदंबरम के माध्यम से देश की संसद से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की निंदा करने की बजाय इसे भगवा आतंकवाद का र...
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स्तम्भ - ३९ *RSS के बाग़ से निकले फूलो मे सुगंध कुछ ज्यादा होती है ...* कभी कभी सालो तक कुछ नहीं होता और कभी कभी मिनटो मे इतिहास बदल जाता है। 2014 मे महाराष्ट्र की राजनीतिक डिक्शनरी मे बीजेपी मतलब गोपीनाथ मुंडे, शिवसेना मतलब ठाकरे वंश और NCP मतलब शरद पवार होता था। उस समय शायद ही किसी ने इन तीन पार्टियों के लिये इस तस्वीर की कल्पना की होंगी। 2014 मे मोदीजी की आंधी मे लोकसभा के साथ साथ विधानसभाये भी हिल गयी। महाराष्ट्र मे 46 सीटों वाली बीजेपी 122 पर आ खड़ी हुई, शिवसेना का बाला साहेब के बिना ये पहला चुनाव था। उद्धव को पूरा सीनियर ठाकरे वाला ट्रीटमेंट मिल रहा था इसलिए उसने बीजेपी को समर्थन दे दिया। बीजेपी ने सभी को चौकाते हुए देवेंद्र फडणवीस को आगे कर दिया। RSS के बाग़ से निकले फूलो मे सुगंध कुछ ज्यादा होती है क्योंकि सड़के नापा हुआ व्यक्ति होता है। यही कारण था कि देवेंद्र फडणवीस का काम 2019 मे उन्हें फिर जीता गया इस बार सीटें 105 थी। दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे जो 1997 से ही खुद मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा था। उसकी महत्वकांक्षा तीव्र हो गयी, इसलिए उसने NCP और कांग्रेस से हाथ मिलाकर बाल ठाकरे क...
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स्तम्भ - ३६/२०२४ मुस्लिम वोटों पर भरोसा कर हिंदुओं को जूते की नोक पर रखने का नतीजा मिला MVA को - उद्धव को समझना चाहिए कि “एक हैं सेफ हैं” का क्या मतलब है - MVA आज महाविकास अघाड़ी की जगह “महा विनाश अघाड़ी” बन गया - इन लोगों ने सोचा था जैसे कर्नाटक और तेलंगाना में 13 - 13 % मुसलमानों की आबादी से एकतरफा वोट लेकर दोनों राज्यों में सरकार बनाई थी, वैसे ही महाराष्ट्र के करीब 12% मुसलमानों के दम पर सरकार बना लेंगे और मुस्लिम वोट का भरोसा दिया AIMPLB के मौलाना सज्जाद नोमानी ने जिसके सामने कांग्रेस, शरद पवार और उद्धव लोट गए कि उसकी हर मांग मान ली, यहां तक RSS को बैन करने का भी वादा कर दिया - आज की जीत के बाद साबित हुआ कि मुस्लिमों के एकजुट होकर MVA को वोट देना भी किसी काम नहीं आया और इसलिए अब मुस्लिमों को मिलने वाली सुविधाएं बंद कर देनी चाहिए क्योंकि जब कांग्रेस और उसके सहयोगी केवल मुस्लिमों के लिए योजनाएं लाते हैं तो फिर भाजपा को भी उन्हें योजनाओं से बाहर रखने का अधिकार है क्योंकि जब वोट ही नहीं देते तो किसी योजना का लाभ क्यों मिले - नोमानी से MVA ने वादा किया किया तो...
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स्तम्भ : ३५/२०२४ अब यह दिन की रोशनी की तरह साफ है कि कांग्रेस पूरी तरह भारतीय राजनीति का मुस्लिम प्रकोष्ठ बन चुकी है। उसे अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ कहना भी ठीक नहीं है क्योंकि देश के वास्तविक अल्पसंख्यकों से उसे कोई लेना-देना नहीं है। न वह यह सच स्वीकार करने को तैयार हो सकती कि किसी भी समुदाय की थोक बीस करोड़ आबादी कभी अल्पसंख्यक नहीं हो सकती। अल्पसंख्यकों के नाम पर कांग्रेस को शुरू से ही मुसलमानों से मतलब रहा है। मुसलमानों से भी नहीं, केवल उनके वोट से, जिसे एक सुरक्षित बैंक की तरह बाँधकर इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस के लिए आरक्षित और सुरक्षित बैंक के रूप में मुसलमान सबसे चतुर, चौकन्ने और सावधान वोट रहे हैं, जिन्होंने क्षेत्रीय सेक्युलर दलों के उभार पर आने तक कांग्रेस की मजेदार सवारी की और कांग्रेस के कमजोर पड़ते ही उससे टूटे हुए टुकड़ों पर लटककर झूमते रहे। जैसे महाराष्ट्र में एनसीपी और बंगाल में टीएमसी। यूपी में सपा-बसपा, बिहार में आरजेडी। लेकिन जहाँ औवेसी टाइप के अवतार आए तो उन्होंने नई दुकानों के एक पार्षद या विधायक को जिताने में जरा भी देर नहीं की। सेक्युलर पार्टियों के सहारे वे तभी तक रहते ...
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स्तम्भ - 29/2024 इनके पास ढंग के वकील तक नहीं हैं कोर्ट में तर्क करने के लिए! सिंघवी ने कह दिया कि भेदभाव है, जज ने मान लिया भेदभाव है, अंतरिम आदेश आ गया। क्या दुकान के बोर्ड पर 'शुद्ध शाकाहारी ढाबा' लिखने से वो सुनिश्चित हो जाता है? क्या हिंदुओं के अपने धार्मिक भोजन के अधिकार नहीं हैं? क्या यह विषय केवल भेदभाव और शाकाहार-मांसाहार का ही था? थूकने और मूतने की वीडियो देख कर कोई हिंदू कैसे ऐसे दुकानों से सामान ले ले जिनकी आस्था या कहती है कि काफिरों के भोजन और धर्म को जितना संभव हो दूषित करो? इन जजों को दिखाओ और पूछो कि इतने वीडियो में हम 'व्यक्ति' को देखें या 'सामूहिक सोच' को? या मामला व्यक्तिगत है ही नहीं। इन्हें इनकी किताबों की पंक्तियाँ दिखाईं जाए और पूछा जाए कि आम मुसलमान इन्हें मानता है या नहीं। अगर जवाब 'ना' हो तो ऐसी घृणास्पद किताबों को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए जाएँ। इतने वर्षों में हमारे पास ढंग के 10 अधिवक्ता नहीं है जो अपनी रील कटवाने और ट्विटर पर एक ही रील के पोस्ट हर दिन करने में व्यस्त ना हों। जय जय भारत ... 🙏
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स्तम्भ - १७/२०२४ दो नरेंद्रो की कन्याकुमारी यात्रा .. PM मोदी का मौन व्रत रोकवाने अभिषेक मनु सिंघवी पहुंचे चुनाव आयोग के द्वार! अभी कितना और करेंगे पापाचार? राम मंदिर निर्माण में जितना ज्यादा अड़चन लगा सकते थे, लगाए। राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण मिलने के बाद भी नहीं गए। जो गए, उन्हे पार्टी से निकाल दिया। अब इन्हें पूजा पाठ, योग, ध्यान से भी समस्या है। यह मोदी का व्यक्तिगत मामला है। कोंग्रेस को इसमें भी समस्या? इन्हें लग रहा कि ये आचार संहिता का उल्लंघन है! इससे मोदी को अपरोक्ष रूप से मीडिया का प्रसारण मिल जायेगा! बहरहाल...... दो नरेन्द्रों की कन्याकुमारी यात्रा: एक ऐतिहासिक पुनरुक्ति 2019 में अंतिम मतदान की पूर्व संध्या को प्रधानसेवक बाबा केदार के दरबार में उपस्थित हुए थे, यहीं उन्होंने ध्यान लगाया था। बहुत दिनों से सोच रहा था कि इस बार वे किस धाम में ध्यान धरेंगे। पर आज जब पता चला कि वे उसी दिव्य शिला पर जाएंगे जहाँ देवी कन्याकुमारी के चरणचिह्न अंकित हैं और जिस शिला ने सोए हुए हिन्दूराष्ट्र को हिला कर रख दिया था, और जहाँ पर स्वामी विवेकानन्द ने ध्यान कि...
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स्तम्भ - १७/२०२४ PM श्री मोदी जी का मौन व्रत रोकवाने अभिषेक मनु सिंघवी पहुंचे चुनाव आयोग के द्वार! अभी कितना और करेंगे पापाचार? राम मंदिर निर्माण में जितना ज्यादा अड़चन लगा सकते थे, लगाए। राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण मिलने के बाद भी नहीं गए। जो गए, उन्हे पार्टी से निकाल दिया। अब इन्हें पूजा पाठ, योग, ध्यान से भी समस्या है। यह मोदी का व्यक्तिगत मामला है। कोंग्रेस को इसमें भी समस्या? इन्हें लग रहा कि ये आचार संहिता का उल्लंघन है! इससे मोदी को अपरोक्ष रूप से मीडिया का प्रसारण मिल जायेगा! बहरहाल...... दो नरेन्द्रों की कन्याकुमारी यात्रा: एक ऐतिहासिक पुनरुक्ति 2019 में अंतिम मतदान की पूर्व संध्या को प्रधानसेवक बाबा केदार के दरबार में उपस्थित हुए थे, यहीं उन्होंने ध्यान लगाया था। बहुत दिनों से सोच रहा था कि इस बार वे किस धाम में ध्यान धरेंगे। पर आज जब पता चला कि वे उसी दिव्य शिला पर जाएंगे जहाँ देवी कन्याकुमारी के चरणचिह्न अंकित हैं और जिस शिला ने सोए हुए हिन्दूराष्ट्र को हिला कर रख दिया था, और जहाँ पर स्वामी विवेकानन्द ने ध्यान किया है, तो उस स्थान के भ...
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स्तम्भ - 13/2024 *श्री नरेंद्र मोदी जी की हाहाकारी जीत ...* 2024 में अनुमान से कहीं अधिक नरेंद्र मोदी की हाहाकारी जीत 1984 के राजीव गांधी की कांग्रेसी जीत को मात देने जा रही है। तब इंदिरा लहर थी , अब की राम लहर है। बतर्ज राम से बड़ा राम का नाम। बड़े-बड़े अक्षरों में कहीं यह लिख कर रख लीजिए। स्क्रीनशॉट ले कर रख लीजिए। ताकि सनद रहे और वक़्त ज़रूरत काम आए। आलम यह है कि जनता के बीच कभी भूल से भी नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कोई टिप्पणी कर देने पर जनता मारने के लिए दौड़ा लेती है। समय पर चुप न हो जाइए तो पिटने की नौबत आ जा रही है। हालां कि राजनीति और चुनाव में असंभव जैसा शब्द कभी नहीं होता। कभी भी कुछ भी संभव हो सकता है। अपराजेय कहे जाने नरेंद्र मोदी भी कभी न कभी हार सकते हैं पर अभी और बिलकुल अभी तो नामुमकिन है। 2024 के इस चुनाव में मोदी के 400 पार के टारगेट को रोक पाना किसी भी के लिए असंभव सा ही दिखता है फ़िलहाल। 400 पार नहीं , न सही , 400 के आसपास तो है ही। दस-पांच सीट आगे-पीछे हो सकती हैं। बस। बहुत ज़्यादा उलटफेर होता नहीं दीखता , 2024 की चुनावी धरती पर। विकास के असंख्य काम तो हैं ही भाजपा और एन डी...
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स्तंभ -१३/२०२४ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राष्ट्रीय विचारों का पोषण कर समाज जागरण का कार्य करने वाला संगठन है। संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशव बलिराम जी हेडगेवार ने नागपुर में की थी। कार्यकर्ताओं की तपस्या व निःस्वार्थ सेवा का ही परिणाम है कि आज संघ को समाज का भरपूर समर्थन और स्नेह मिल रहा है। देश में कोई विरला व्यक्ति ही होगा, जो संघ के नाम से अपरिचित होगा। पर, संघ विरोधी मानसिकता वाले कुछ लोग समय-समय पर समाज में भ्रम पैदा करने के लिए झूठे एवं असत्य दावे करते रहते हैं, संघ को लेकर अप-प्रचार भी किया जाता है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम से बैनर लगाया गया है और कुछ लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। जिसमें कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में देशभर में आरएसएस ने इंडी गठबंधन को समर्थन दिया है। वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुआ है। ये वे लोग हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम से नया संगठन खड़ा करने और उसको पंजीकृत कराने का असफल एवं हास्यास्पद प्रयास कर रहे हैं। जिन्हें सफलता नहीं मिल रही है । वन्दे भारत मातरम् ...
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स्तंभ - १/२०२४ *श्री राम के भारत देश में मोदी जी की कृष्ण नीति* भारत श्री राम का देश है । श्री राम मतलब मर्यादा । अयोध्या एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर कर देने से कुछ व्याकुल भारत घायल हो गए हैं। बहुत ज़्यादा घायल। इन सब का कहना है कि एयरपोर्ट का नाम अगर राम के नाम से बदल कर कुछ करना ही था तो तुलसीदास करना था। महर्षि वाल्मीकि के नाम क्यों किया ? महर्षि वाल्मीकि क्या तुलसीदास से बड़े हैं? महर्षि वाल्मीकि का अयोध्या से क्या संबंध है? इन घायलों का बड़ा दुःख यह है कि यह निर्णय राजनीतिक है। वोट के लिए किया गया है। दलित वोट के लिए किया गया है। यह बात भी निर्विवाद रुप से सही है। इस से बिलकुल ऐतराज नहीं है। लेकिन इन व्याकुल भारत टाइप घायलों को कोई बताने वाला नहीं है कि अगर महर्षि वाल्मीकि न होते तो तुलसीदास कहां होते? कहां होते रामायण के अन्य रचनाकार भी। महर्षि वाल्मीकि रामायण के बीज हैं। बाक़ी सब वृक्ष। बीज है तो वृक्ष है। निर्मम सच यह भी है कि राम मंदिर सिर्फ़ पूजा-पाठ के लिए नहीं बन रहा। राजनीति और इस से जुड़ा वोट भी एक बड़ा फैक्टर है। तो क्या इस बिना पर राम मंदिर बनना ही नहीं चाह...
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स्तंभ - २०२ *श्री राम के भारत देश में मोदी जी की कृष्ण नीति* अयोध्या एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर कर देने से कुछ व्याकुल भारत घायल हो गए हैं। बहुत ज़्यादा घायल। इन सब का कहना है कि एयरपोर्ट का नाम अगर राम के नाम से बदल कर कुछ करना ही था तो तुलसीदास करना था। महर्षि वाल्मीकि के नाम क्यों किया ? महर्षि वाल्मीकि क्या तुलसीदास से बड़े हैं? महर्षि वाल्मीकि का अयोध्या से क्या संबंध है? इन घायलों का बड़ा दुःख यह है कि यह निर्णय राजनीतिक है। वोट के लिए किया गया है। दलित वोट के लिए किया गया है। यह बात भी निर्विवाद रुप से सही है। इस से बिलकुल ऐतराज नहीं है। लेकिन इन व्याकुल भारत टाइप घायलों को कोई बताने वाला नहीं है कि अगर महर्षि वाल्मीकि न होते तो तुलसीदास कहां होते? कहां होते रामायण के अन्य रचनाकार भी। महर्षि वाल्मीकि रामायण के बीज हैं। बाक़ी सब वृक्ष। बीज है तो वृक्ष है। निर्मम सच यह भी है कि राम मंदिर सिर्फ़ पूजा-पाठ के लिए नहीं बन रहा। राजनीति और इस से जुड़ा वोट भी एक बड़ा फैक्टर है। तो क्या इस बिना पर राम मंदिर बनना ही नहीं चाहिए ? तो क्या राम मंदिर बनना ही नहीं चाहिए, यह भी राजनीति न...