विवाह व्यक्तिगत, विचारधारा सार्वजनिक ... निधि-उमर की शादी, पहले पायल को अब्दुल्ला बनाया अब निधि को, नीलेश-महेश भट्ट का पुराना रिश्ता-- "जवानी में चर्चा बुढ़ापे में क़यामत" -------------------------------------------------------- 30 अक्टूबर को निधि राजदान और उमर अब्दुल्ला ने पुनर्विवाह किया । इनकी शादी सिर्फ निजी खबर नहीं। यह उस घेरे की याद दिलाती है, जहां नाम बार-बार एक-दूसरे से जुड़ते दिखते हैं। निधि पहले नीलेश मिश्रा की पत्नी थीं। नीलेश को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका महेश भट्ट ने दिया था—‘जिस्म’ के गाने से। महेश भट्ट उनके मेंटर रहे। ये वही महेश भट्ट है जो मुंबई आतंकी हमले को हिंदू टेररिज्म सिद्ध कर रहा था।उमर अब्दुल्ला का राजनीतिक रिकॉर्ड भी जाना-पहचाना है—अनुच्छेद 370 का विरोध, कश्मीर की स्वायत्तता का पक्ष और पाकिस्तान से संवाद की वकालत। कश्मीरी पंडितों के पलायन और हत्याओं पर स्वतंत्र जांच की मांग आज भी अधूरी है। पहले के एनडीटीवी की निधि राजदान आतंकियों की पैरोकारी किया करती थी मतलब एक ही थाली के लाल चट्टे बट्टे हैं। सवाल निजी रिश्तों का नहीं। सवाल यह है कि क्या भारत में एक ऐ...
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निधि-उमर की शादी, पहले पायल को अब्दुल्ला बनाया अब निधि को, नीलेश-महेश भट्ट का पुराना रिश्ता-- "जवानी में चर्चा बुढ़ापे में क़यामत" -------------------------------------------------------- निधि राजदान और उमर अब्दुल्ला की शादी सिर्फ निजी खबर नहीं। यह उस घेरे की याद दिलाती है, जहां नाम बार-बार एक-दूसरे से जुड़ते दिखते हैं। निधि पहले नीलेश मिश्रा की पत्नी थीं। नीलेश को बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका महेश भट्ट ने दिया था—‘जिस्म’ के गाने से। महेश भट्ट उनके मेंटर रहे। ये वही महेश भट्ट है जो मुंबई आतंकी हमले को हिंदू टेररिज्म सिद्ध कर रहा था।उमर अब्दुल्ला का राजनीतिक रिकॉर्ड भी जाना-पहचाना है—अनुच्छेद 370 का विरोध, कश्मीर की स्वायत्तता का पक्ष और पाकिस्तान से संवाद की वकालत। कश्मीरी पंडितों के पलायन और हत्याओं पर स्वतंत्र जांच की मांग आज भी अधूरी है। पहले के एनडीटीवी की निधि राजदान आतंकियों की पैरोकारी किया करती थी मतलब एक ही थाली के लाल चट्टे बट्टे हैं। सवाल निजी रिश्तों का नहीं। सवाल यह है कि क्या भारत में एक ऐसा वैचारिक नेटवर्क बना है, जहां कुछ पत्रकार, लेखक, फिल्मकार और राजनीतिक आवाजें...
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राजनीति मे अंत मे जीत गणित की होती है, भारत की वृद्धि विकास दर 7.8% रही, ये अप्रैल से जून वाली तिमाही की है। सामान्य जनता पर असर अप्रत्यक्ष होता है मगर सरकार के स्तर पर ये बहुत बड़ी उपलब्धि है। होर्मूज अब भी बंद है, रूस यूक्रेन युद्ध मे है बावजूद उसके इतनी जीडीपी मजाक नहीं है, लेकिन ट्रम्प चाचा के अब उल्टे दिन चल रहे है और यही सबसे रोमांचक बात है। दरसल अमेरिका मे मध्यावधि चुनाव होने है और ये ट्रम्प की अग्निपरीक्षा है, यदि रिपब्लिकन पार्टी हार गयी तो ट्रम्प का सूर्य डूब गया समझो। जैसे भारत मे संसद है वैसे अमेरिका मे कांग्रेस है इसके भी दो सदन है सबसे बड़ी सीनेट दूसरा हॉउस। अभी ट्रम्प चाचा उड़ रहे थे क्योंकि इन दोनों सदनो मे उनके पास बहुमत था, लेकिन ट्रम्प की समस्या है उनकी अप्रूवल रेटिंग। आप सोचिये मोदीजी की नई रेटिंग 68% है जबकि ट्रम्प की 33%। आप सोचकर देखिये ट्रम्प पर कितना प्रेशर होगा, ईरान को लेकर भी यही समस्या है। दरसल अमेरिका का राष्ट्रपति सीधे युद्ध नहीं छेड़ सकता सिर्फ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रम्प भी वही कर रहे है इसलिए ईरान मे वैसे परिणाम नहीं आये जैसे इराक मे आये थे। इसके विप...
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--- अमेरिका -- भारत -- और -- तिलचट्टा ---- अमेरिका को अपना नुकसान बर्दाश्त नहीं है। अमेरिका को यह भी पसंद नहीं है कि उसकी दादागिरी में कोई दखल डाले ? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो - यह अमेरिका को पसंद नहीं है। सामरिक क्षेत्र में उसकी शाख को बट्टा लगे - यह भी उसे बर्दाश्त नहीं? इस व्यवहार में अमेरिका का पक्ष विपक्ष - सबों की राय एक है। दुनियां के देशों को औकात पर लाने के लिए अमेरिका समय-समय पर बेइज्जती भी करने से बाज नहीं आता? जरा ख्याल कीजिए? कैसे हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की पगड़ी और वस्त्र उतरवाकर एयरपोर्ट पर जांच किया गया था? यह जांच नहीं था भाई साहब ! यह भारत की प्रतिष्ठा का मान-मर्दन हुआ था? अमेरिका दूसरे देशों में किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए OPERATION 37 और Deep State का प्रयोग करता है। यह अमेरिका का एक गैर सरकारी संगठन है जिसका कमान अमेरिका के राष्ट्रपति के हाथ में होता है। इसका संचालन अमेरिका का खुफिया विभाग CIA, सेना के विशेषज्ञ, आला अधिकारी, घटनाओं को अंजाम देने वाले ट्रेंड लोग और दुनियां से नफरत करने वाले अमेरिकी पूंजीपति ...
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लोग कहते हैं कि आजकल की जेनरेशन बहुत बुद्धिमान है। पर मुझे लगता है कि इससे चूतिया जेनरेशन आज तक पैदा नहीं हुई। क्योंकि इनको मालूम ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और उसके परिणाम क्या होंगे। चार दिन से जंतर-मंतर के वीडियो देख रहा हूँ। सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं। ये वीडियो कहाँ से आईं? ये उसी भीड़ के एक हिस्से ने बनाई हैं, जो जंतर-मंतर पर मौजूद है। वहाँ से जो भी वीडियो आ रहा है, वह हमें बहुत कुछ दिखा रहा है। उस भीड़ में लड़के हैं, लड़कियाँ हैं, यंग जेनरेशन है। सब 20–22 साल के आसपास के। फैंसी टी-शर्ट, फैंसी कपड़े और फैंसी हेयरस्टाइल बनाकर इस तरह जंतर-मंतर पर घूम रहे हैं जैसे यह कोई आंदोलन नहीं, बल्कि फैशन शो या पिकनिक स्पॉट हो। यहाँ आकर यूट्यूबर्स और मीडिया कैमरों के सामने बाइट देना, गालियाँ देना और अजीब-अजीब स्लोगन लिखे हुए कट-आउट हाथ में लेकर घूमना, एक तरह का स्टेटस सिंबल बन गया है। लड़कियाँ ऐसे कट-आउट लेकर घूम रही हैं जिन पर इतने भद्दे, गंदे और अश्लील स्लोगन लिखे हैं कि मेरी जेनरेशन के लोगों को उन्हें पढ़ने में भी शर्म आती है। देश के प्रधानमंत्री के लिए, देश के लिए ज...
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वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे" पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है। अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं। इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीड...
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वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे" पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है। अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं। इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीड...