वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे"
पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है।
इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है।
अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं।
इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं।
जिन्होंने वक्फ बोर्ड को अरबों, खरबों रुपए की लाखों एकड़ ज़मीन मुफ्त में दे दी, जिन्होंने वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार दिए, वक्फ संशोधन बिल के विरोध में वोटिंग करी, करोड़ों के हज हाउस बनवाए, हज सब्सिडी के लिए देश का खज़ाना लुटाया, राममंदिर का हमेशा विरोध किया, राम को काल्पनिक बताया, रामसेतु तोड़ने के प्रयास किये, रामलला को वर्षों तक तम्बू में रखा, राममंदिर निर्माण में हर तरह के रोड़े अटकाए, सुप्रीम कोर्ट में मंदिर के विरोध में वकील खड़े किये वो सभी दोगले नेता आज राममंदिर चढ़ावा चोरी पर घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं।
कांग्रेस नेता दिग्विजयसिंह ने तो बड़ी ही निर्लज्जता के साथ राममंदिर में दान किये अपने एक लाख दस हज़ार की राशि वापस माँग ली और अयोध्या कोर्ट में केस करने तक की धमकी दे डाली तो एक रामभक्त ने उनके नाम पर चेक बनाकर अपना नंबर भी सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया कि दिग्विजयसिंह ये राशि उनसे प्राप्त कर सकते हैं।
इतने वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद भव्य राममंदिर के निर्माण और ना केवल भारत बल्कि पूरे विश्व से जिस तरह से सनातनी राममंदिर के दर्शन को आ रहे हैं उससे भी इन दोगले नेताओं की नींद उड़ी हुई है।
इन दोगलों ने कभी वक्फ बोर्ड से हिसाब नहीं पूछा, कभी वक्फ द्वारा अवैध रूप से हथियाई गई प्रॉपर्टी का विरोध नहीं किया लेकिन राममंदिर चढ़ावा चोरी पर इनका दुःख (?) आम जनमानस को हजम नहीं हो रहा है।
ऐसा कहा जाता है कि जापानी लोग भारतीयों को कभी अपने घर पर नहीं बुलाते हैं उसका कारण ये है कि भारतीय विशेषकर हिंदू कभी अपने धर्म और देश के प्रति उतने निष्ठावान नहीं रहे जितने दूसरे धर्म और देश के लोग रहते हैं। मुग़ल और अंग्रेज मुट्ठीभर ही भारत में आए थे और सैकड़ों वर्षों तक भारत पर राज किया, लूटा, धर्म परिवर्तन किया, असंख्य हिंदुओं की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किए क्योंकि इसमें उनका साथ देनेवाले, उनसे डरकर अपना धर्म परिवर्तन करने वाले, अपनी महिलाओं को मुगलों, अंग्रेज़ों के हवाले करने वाले, हिंदू होकर भी हिंदुओं पर ही अत्याचार करने वाले स्वयं हिंदू ही थे।
जालियावालाँ बाग नरसंहार को जनरल डायर के इशारे पर हिंदुओं ने ही अंजाम दिया था। अपने धर्म और देश का अपमान करने वाले, सहन करने वाले भी हिंदू ही सबसे ज़्यादा हैं। ऐसे दोगले हिंदू पहले भी थे और आज भी हैं।
कांग्रेस, सपा, TMC, DMK, आम आदमी पार्टी जैसे तमाम हिंदू विरोधी, देश विरोधी दलों के अधिकांश नेता, समर्थक, पत्रकार, फिल्मकार, कलाकार, लेखक, तथाकथित बुद्धिजीवी अधिकांश हिंदू ही हैं।
इतिहास साक्षी है कि जिस जनता ने अपने देश और धर्म का सम्मान, प्रेम, रक्षा नहीं की वो समाप्त हो गए।
चढ़ावा चोरी के आरोपी पकड़े जा रहे हैं, पकड़े जाएँगे, इसमें भी अगर कोई षड्यंत्र है तो वो भी सामने आएगा लेकिन हमारे गौरव के प्रतीक राममंदिर का उपहास उड़ाना, उसका तिरस्कार करना और इन दोगले नेताओं, उनके समर्थकों के बहकावे में आना हमें फिर से गर्त में ही ले जाएगा।
ताकि सनद रहे.. वक्त ज़रूरत काम आवै !!
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