विश्व को भारत की नितान्त आवश्यकता है ।

विश्व को भारत की नितान्त आवश्यकता है । भारत को अपनी प्रकृति; संस्कृति की सुदृढ़ नींव पर खड़ा होना ही पड़ेगा , इसलिये राष्ट्र के बारे में यह स्पष्ट कल्पना व उसका गौरव मन में लेकर समाज में सर्वत्र सद्भाव, सदाचार तथा समरसता की भावना सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

इन सभी प्रयासों में संघ के स्वयंसेवकों की महती भूमिका है व रहेगी ।  इसके लिए उपयोगी अनेक योजनाओं को यशस्वी करने के लिए संघ के स्वयंसेवक प्रयासरत हैं। प्रत्येक स्वयंसेवक को ही समय की चुनौती को स्वीकार कर कार्यरत होना होगा ।

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