लोग कहते हैं कि आजकल की जेनरेशन बहुत बुद्धिमान है। पर मुझे लगता है कि इससे चूतिया जेनरेशन आज तक पैदा नहीं हुई। क्योंकि इनको मालूम ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और उसके परिणाम क्या होंगे। चार दिन से जंतर-मंतर के वीडियो देख रहा हूँ। सोशल मीडिया पर भरे पड़े हैं। ये वीडियो कहाँ से आईं? ये उसी भीड़ के एक हिस्से ने बनाई हैं, जो जंतर-मंतर पर मौजूद है। वहाँ से जो भी वीडियो आ रहा है, वह हमें बहुत कुछ दिखा रहा है। उस भीड़ में लड़के हैं, लड़कियाँ हैं, यंग जेनरेशन है। सब 20–22 साल के आसपास के। फैंसी टी-शर्ट, फैंसी कपड़े और फैंसी हेयरस्टाइल बनाकर इस तरह जंतर-मंतर पर घूम रहे हैं जैसे यह कोई आंदोलन नहीं, बल्कि फैशन शो या पिकनिक स्पॉट हो। यहाँ आकर यूट्यूबर्स और मीडिया कैमरों के सामने बाइट देना, गालियाँ देना और अजीब-अजीब स्लोगन लिखे हुए कट-आउट हाथ में लेकर घूमना, एक तरह का स्टेटस सिंबल बन गया है। लड़कियाँ ऐसे कट-आउट लेकर घूम रही हैं जिन पर इतने भद्दे, गंदे और अश्लील स्लोगन लिखे हैं कि मेरी जेनरेशन के लोगों को उन्हें पढ़ने में भी शर्म आती है। देश के प्रधानमंत्री के लिए, देश के लिए ज...
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वीर सावरकर जी ने कहा था - "जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उस दिन सेक्युलर नेता कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहनेंगे" पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं ने एक होकर भाजपा को वोट दिए उसने केवल मुस्लिम वोटों की राजनीति करने वाले और देश के बहुसंख्यक हिंदुओं को जूतों की नोंक पर रखने वाले तमाम सेक्युलर दलों, नेताओं की नींद उड़ाकर रख दी है। इसीलिए आजकल तमाम सेक्युलर नेता स्वयं को सबसे बड़ा हिंदूवादी घोषित और साबित करने में लगे हैं। केजरीवाल जैसे महाधूर्त ने तो बाकायदा बयान दिया है कि देश में सबसे बड़ी और सच्ची सनातनी कोई पार्टी है तो वो आम आदमी पार्टी है। अखिलेश यादव भी उत्तरप्रदेश को सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की बात कह रहे हैं लेकिन इन सबके मन में अचानक से उमड़ा ये "हिंदू प्रेम" केवल बंगाल में भाजपा की जीत नहीं हैं। इनको राममंदिर में हुई चढ़ावा चोरी ने भी बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है, जो राममंदिर के उद्घाटन में निमंत्रण के बावजूद नहीं गए वो आज रामलला के दर्शन को भाग रहे हैं। जिन दोगलों ने कभी रामजी के मंदिर के लिए एक लाइन तक ना लिखी ना बोली वो चढ़ावा चोरी पर लंबे लंबे लेख, पोस्ट लिख रहे हैं, वीड...
--- अमेरिका -- भारत -- और -- तिलचट्टा ---- अमेरिका को अपना नुकसान बर्दाश्त नहीं है। अमेरिका को यह भी पसंद नहीं है कि उसकी दादागिरी में कोई दखल डाले ? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो - यह अमेरिका को पसंद नहीं है। सामरिक क्षेत्र में उसकी शाख को बट्टा लगे - यह भी उसे बर्दाश्त नहीं? इस व्यवहार में अमेरिका का पक्ष विपक्ष - सबों की राय एक है। दुनियां के देशों को औकात पर लाने के लिए अमेरिका समय-समय पर बेइज्जती भी करने से बाज नहीं आता? जरा ख्याल कीजिए? कैसे हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की पगड़ी और वस्त्र उतरवाकर एयरपोर्ट पर जांच किया गया था? यह जांच नहीं था भाई साहब ! यह भारत की प्रतिष्ठा का मान-मर्दन हुआ था? अमेरिका दूसरे देशों में किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए OPERATION 37 और Deep State का प्रयोग करता है। यह अमेरिका का एक गैर सरकारी संगठन है जिसका कमान अमेरिका के राष्ट्रपति के हाथ में होता है। इसका संचालन अमेरिका का खुफिया विभाग CIA, सेना के विशेषज्ञ, आला अधिकारी, घटनाओं को अंजाम देने वाले ट्रेंड लोग और दुनियां से नफरत करने वाले अमेरिकी पूंजीपति ...
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