राजनीति मे अंत मे जीत गणित की होती है, भारत की वृद्धि विकास दर 7.8% रही, ये अप्रैल से जून वाली तिमाही की है। सामान्य जनता पर असर अप्रत्यक्ष होता है मगर सरकार के स्तर पर ये बहुत बड़ी उपलब्धि है।

होर्मूज अब भी बंद है, रूस यूक्रेन युद्ध मे है बावजूद उसके इतनी जीडीपी मजाक नहीं है, लेकिन ट्रम्प चाचा के अब उल्टे दिन चल रहे है और यही सबसे रोमांचक बात है। दरसल अमेरिका मे मध्यावधि चुनाव होने है और ये ट्रम्प की अग्निपरीक्षा है, यदि रिपब्लिकन पार्टी हार गयी तो ट्रम्प का सूर्य डूब गया समझो।

जैसे भारत मे संसद है वैसे अमेरिका मे कांग्रेस है इसके भी दो सदन है सबसे बड़ी सीनेट दूसरा हॉउस। अभी ट्रम्प चाचा उड़ रहे थे क्योंकि इन दोनों सदनो मे उनके पास बहुमत था, लेकिन ट्रम्प की समस्या है उनकी अप्रूवल रेटिंग। आप सोचिये मोदीजी की नई रेटिंग 68% है जबकि ट्रम्प की 33%।

आप सोचकर देखिये ट्रम्प पर कितना प्रेशर होगा, ईरान को लेकर भी यही समस्या है। दरसल अमेरिका का राष्ट्रपति सीधे युद्ध नहीं छेड़ सकता सिर्फ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रम्प भी वही कर रहे है इसलिए ईरान मे वैसे परिणाम नहीं आये जैसे इराक मे आये थे। इसके विपरीत भारत मे व्यवस्था अलग है।

भारत को यदि किसी देश से युद्ध करना हो तो मोदीजी को बस द्रोपदी मुर्मू के हस्ताक्षर चाहिए और फिर जो देश चाहो नक़्शे से मिटा दो। लेकिन ट्रम्प को दोनों सदनो से मंजूरी चाहिए, अभी रिपब्लिकन बहुमत मे है तो मंजूरी नहीं मिल रही डेमोक्रेट्स तो क्या ही देंगे।

ये चुनाव नवम्बर दिसम्बर मे होने है मगर इस समय पार्टी के अंदर उम्मीदवारो के चुनाव हो रहे है। अमेरिका मे ऐसे नहीं होता कि अखिलेश दिल्ली मे रहेगा और डिम्पल को लखनऊ भेज देगा, यहाँ कोई पार्टी का मालिक नहीं होता अंतरिम चुनाव आवश्यक है।

अब ट्रम्प का हाल इतना बुरा है कि ट्रम्प समर्थित उम्मीदवार पार्टी मे भी नहीं जीत रहे है। अमेरिका मे एक बड़ी आबादी भारतीयों, चीनियों, कोरियन्स और जापानियों की भी है वे ट्रम्प के विरुद्ध वोट करने वाले है। लेकिन अमेरिका मे कुछ राज्य है जहाँ रिपब्लिकन ही जीतेंगे।

जैसे गुजरात और मध्यप्रदेश मे आपको पता होता है कि बीजेपी ही जीतेगी वैसे ही अमेरिका के 50 मे से 43 राज्यों मे डेमोक्रेट और रिपब्लिकन ही जीतने है। लेकिन 7 स्विंग स्टेटस है और इनमे जिसने बाजी मार ली समझो वो जीत जाएगा।

हालांकि ट्रम्प इससे हट नहीं जाएंगे लेकिन उनके ऊपर अविश्वास प्रस्ताव की तलवार लटकती रहेगी। जरा भी इधर उधर हुए तो अविश्वास प्रस्ताव आ सकता है और चूंकि डेमोक्रेटिक संख्याबल मे रहेंगे तो जाहिर है आपको जेडी वेंस के लिए सिन्हासन छोड़ना पड़े।

ट्रम्प चाचा जितने बड़े संकट मे है वही उनके परम मित्र मोदीजी मजे मे है, UGC पर कितना ही गंध मच जाए। चाहे कितने ही आंदोलन हो जाये मगर भारत के विकास के जो आंकड़े सामने आ रहे है वे प्रशंसनीय है। भारत मे कोई भी सरकार विरोधी तत्व मुगालते मे ना रहे, 2027 मे यूपी मे योगी आ रहे है और 2029 मे मोदी शाह या बीजेपी जिसे खड़ा करें वो आएगा।

अमेरिका मे लाख उथल पुथल हो भारत मे कमल ही खिलना है।

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